पटवारी रिपोर्ट राजस्व विभाग द्वारा जारी की जाने वाली एक आधिकारिक रिपोर्ट होती है। इसे संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा भूमि अभिलेखों (जैसे जमाबंदी, खसरा, गिरदावरी आदि) की जांच के बाद तैयार किया जाता है। इस रिपोर्ट में भूमि स्वामित्व, भूमि का क्षेत्रफल, सिंचाई का स्रोत (नहर, ट्यूबवेल आदि) तथा अन्य आवश्यक विवरण प्रमाणित किए जाते हैं। आपकी फोटो में दिया गया फॉर्म विशेष रूप से कृषि विभाग, हरियाणा द्वारा कृषि यंत्रों पर अनुदान (Subsidy) प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाने वाला पटवारी रिपोर्ट फॉर्म है। इस रिपोर्ट का मुख्य उद्देश्य यह प्रमाणित करना होता है कि: आवेदक भूमि का वास्तविक स्वामी है। भूमि का क्षेत्रफल कितना है। भूमि किस प्रकार सिंचित है (नहर, ट्यूबवेल आदि)। भूमि का विवरण राजस्व रिकॉर्ड से मेल खाता है। आवेदक सरकारी योजना की पात्रता रखता है। कहाँ-कहाँ उपयोग होती है? पटवारी रिपोर्ट का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में किया जाता है: कृषि यंत्रों पर सरकारी सब्सिडी प्राप्त करने के लिए। प्रधानमंत्री कृषि योजनाओं एवं राज्य सरकार की कृषि योजनाओं में आवेदन हेतु। भूमि स्वामित्व के सत्यापन के लिए। कृषि ऋण (Agricultural Loan) लेने के समय। फसल बीमा योजनाओं में। भूमि संबंधी सरकारी अनुदान प्राप्त करने में। सिंचाई योजनाओं के लाभ लेने के लिए। बागवानी एवं कृषि विकास योजनाओं में। भूमि रिकॉर्ड सत्यापन के लिए। अन्य राजस्व एवं कृषि विभाग की योजनाओं में। रिपोर्ट में शामिल प्रमुख जानकारी आवेदक का नाम पिता/पति का नाम पता भूमि का विवरण खसरा/किला नंबर (जहाँ लागू हो) भूमि का कुल क्षेत्रफल सिंचाई का स्रोत राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार सत्यापन पटवारी के हस्ताक्षर नाम एवं मुख्यालय दिनांक कौन जारी करता है? यह रिपोर्ट संबंधित हल्का पटवारी द्वारा जारी की जाती है तथा आवश्यक होने पर कानूनगो या अन्य राजस्व अधिकारी द्वारा सत्यापित भी की जा सकती है। आवश्यक दस्तावेज़ आधार कार्ड पहचान पत्र जमाबंदी/फर्द की प्रति भूमि से संबंधित दस्तावेज़ आवेदन पत्र (यदि आवश्यक हो)